वहाँ राह में बैठी पत्नी
करे फोन पर फोन
यहाँ एक चिन्ता है बस
आटो रिक्शे का लोन !
उसके हाथों में पूजा की थाली चलनी है
यहाँ बैटरी उसे आज के आज बदलनी है
रोज बैंक से नोटिस आती
बदल बदल कर टोन !
लेकर गया सवारी देखी सर्राफे की भीड़
वहीं कहीं ठेले ले ली पीतल की जंजीर
ये ही उसका हीरा मोती
ये ही चाँदी सोन !
दिन बीता पर घर न पहुंच पाया है परदेसी
चाँद निकलने में देरी है प्रिय के वादे सी
कभी देखती वह दरवाजा
कभी गगन का कोन !
साभार: ज्ञानप्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से
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