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Social Media Poetry: अभी हमारे पाँव थके हैं छाले नहीं पड़े!

काव्य डेस्क

Viral Kavya
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                                                  हो सकता है यह पड़ाव हो
यह गंतव्य नहीं हो  सकता
अभी हमारे पाँव थके हैं छाले नहीं पड़े!

सच्चाई   का   चोला   पहने  
गली  -  गली  में  बैठे  ढोंगी
सदियों से सच खोज रहे हम 
खोज   निरंतर  करनी  होगी

हम  जिसको  सच  मान  रहे हैं
सच वक्तव्य नहीं नहीं हो सकता
देखो!अभी झूठ के चेहरे काले नहीं पड़े!

हमको जो कहना है, खुलकर
कहते    रहें    ज़माने     वाले
हम    सुगंध    फैलाने   वाले
हम  हैं  फूल    उगाने    वाले

फूल   उगाने   भर   से    ही 
पूरा कर्तव्य नहीं हो  सकता
आग उगलते हर मुँह पर यदि ताले नहीं पड़े!

साभार: ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

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