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फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़ल: तेरी तस्वीर उतरती जाती थी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            मौत इक गीत रात गाती थी
        
                                                    
                            
ज़िंदगी झूम झूम जाती थी

कभी दीवाने रो भी पड़ते थे
कभी तेरी भी याद आती थी

ज़िक्र था रंग-ओ-बू का और दिल में
तेरी तस्वीर उतरती जाती थी

थे न अफ़्लाक गोश-बर-आवाज़
बे-ख़ुदी दास्ताँ सुनाती थी

जल्वा-गर हो रहा था कोई उधर
धूप इधर फीकी पड़ती जाती थी

हमा-तन-गोश ज़िंदगी थी 'फ़िराक़'
मौत धीमे सुरों में गाती थी

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2 महीने पहले
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