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Urdu Poetry: यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते
        
                                                    
                            
यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते

ये लोग औरों के दुख जीने निकल आए हैं सड़कों पर
अगर अपना ही ग़म होता तो यूँ धरने नहीं देते

यही क़तरे जो दम अपना दिखाने पर उतर आते
समुंदर ऐसी मन-मानी तुझे करने नहीं देते

क़लम मैं तो उठा के जाने कब का रख चुका होता
मगर तुम हो के क़िस्सा मुख़्तसर करने नहीं देते

हमीं उन से उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं
हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते

~ वसीम बरेलवी

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एक महीने पहले
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