विज्ञापन

Waseem Barelvi Poetry: उदासियों में भी रस्ते निकाल लेता है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


उदासियों में भी रस्ते निकाल लेता है
अजीब दिल है गिरूँ तो सँभाल लेता है

ये कैसा शख़्स है कितनी ही अच्छी बात कहो


कोई बुराई का पहलू निकाल लेता है

ढले तो होती है कुछ और एहतियात की उम्र


कि बहते बहते ये दरिया उछाल लेता है

बड़े-बड़ों की तरह-दारियाँ नहीं चलतीं


उरूज तेरी ख़बर जब ज़वाल लेता है

जब उस के जाम में इक बूँद तक नहीं होती


वो मेरी प्यास को फिर भी सँभाल लेता है

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile