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उदय प्रताप सिंह: होते नहीं ये फ़ैसले सिक्के उछाल के

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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होते नहीं ये फ़ैसले सिक्के उछाल के


दिल का मु'आमला है ज़रा देख-भाल के

मोबाइलों के दौर के 'आशिक़ को क्या पता
रखते थे कैसे ख़त में कलेजा निकाल के

आँधी उड़ा के ले गई ये और बात है
कहने को हम भी पत्ते थे मज़बूत डाल के

जब प्यार मिल गया तो सभी रत्न मिल गए
अब क्या करेंगे और समुंदर खँगाल के

मतलब-परस्त दुनिया की फ़ितरत न पूछिए
काँटे को फेंक देते हैं काँटा निकाल के
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54 मिनट पहले
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