नहीं समझो ज़रा सा इश्क़ हूँ मैं
यक़ीं मानो सरापा इश्क़ हूँ मैं
ख़ुदा से मैं ख़ुदा मुझ से जुड़ा है
तो ये मतलब ख़ुदा का इश्क़ हूँ मैं
ब-वक़्त-ए-शाम अक्सर सोचता हूँ
तिरा कितना पुराना इश्क़ हूँ मैं
मिरे सुख-दुख तो बस तुझ से जुड़े हैं
तुझे है नाज़ तेरा इश्क़ हूँ मैं
मिरी पाकीज़गी को यूँ समझ लो
किसी पर्वत से उतरा इश्क़ हूँ मैं
मुझे ख़ुद से जुदा कैसे करेगा
तिरे दिल में समाया इश्क़ हूँ मैं
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से
https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o