अब किसे याद किस धुन में गुज़रा था पिछला ज़माना मेरा
उड़ने वाली स्याही से लिक्खा गया था फसाना मेरा
तुम नही जानते एकतरफ़ा मुहब्बत की महरूमियाँ
तुमने देखा नही अपनी नज़रों से ख़ुद को छुपाना मेरा
फिर तुम्हारे बराबर खड़ा शख्स कुछ इस तरह से हँसा
जैसे तुमने बताया हो उसको है ये भी दीवाना मेरा
अब बहुत तेज़ थी गूँज शहनाईयों की वो सुनता भी क्या
एक ग़लत फ़ैसला था उसे उस घड़ी आज़माना मेरा