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शारिक़ कैफ़ी: किसी तौर दुनिया ठिकाने लगी तो अंदर की दुनिया नचाने लगी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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किसी तौर दुनिया ठिकाने लगी
तो अंदर की दुनिया नचाने लगी

गए थे कि इज़हार कर देंगे आज
वो शादी का जोड़ा दिखाने लगी

बहुत दूर डूबा है कोई जहाज़
मेरी नाव क्यों डगमगाने लगी

कहा मौत से मैं ने कब आएगी
वो अपनी हथेली दिखाने लगी

हवा ने चराग़ों से की मा'ज़रत
मगर जब 'अदालत से जाने लगी

ख़िज़ाँ पेड़ से खेल कर थक गई
तो पत्ते हवा में उड़ाने लगी

ब-मुश्किल खुला था ज़रा आसमाँ
तो अंदर से बौछार आने लगी

ये लड़की तो दिल जीत लेगी मेरा
तुम्हारी तरह मुस्कुराने लगी
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