विज्ञापन

शकील आज़मी: सँभल के चल तुझे सारा जहान देखता है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
        
                                                    
                            
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है

मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफ़ाज़त कर
सँभल के चल तुझे सारा जहान देखता है

कनीज़ हो कोई या कोई शाहज़ादी हो
जो इश्क़ करता है कब ख़ानदान देखता है

घटाएँ उठती हैं बरसात होने लगती है
जब आँख भर के फ़लक को किसान देखता है

यही वो शहर जो मेरे लबों से बोलता था
यही वो शहर जो मेरी ज़बान देखता है

मैं जब मकान के बाहर क़दम निकालता हूँ
अजब निगाह से मुझ को मकान देखता है

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 

एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all