विज्ञापन

परवीन शाकिर: मर भी जाऊँ तो कहाँ लोग भुला ही देंगे

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

मर भी जाऊँ तो कहाँ लोग भुला ही देंगे
लफ़्ज़ मेरे मिरे होने की गवाही देंगे

लोग थर्रा गए जिस वक़्त मुनादी आई
आज पैग़ाम नया ज़िल्ल-ए-इलाही देंगे

झोंके कुछ ऐसे थपकते हैं गुलों के रुख़्सार
जैसे इस बार तो पत-झड़ से बचा ही देंगे

हम वो शब-ज़ाद कि सूरज की 'इनायात में भी
अपने बच्चों को फ़क़त कोर-निगाही देंगे

आस्तीं साँपों की पहनेंगे गले में माला
अहल-ए-कूफ़ा को नई शहर-पनाही देंगे

शहर की चाबियाँ आ'दा के हवाले कर के
तोहफ़तन फिर उन्हें मक़्तूल सिपाही देंगे  
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all