विज्ञापन

निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल: कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया
        
                                                    
                            
हर काम में हमेशा कोई काम रह गया

छोटी थी उम्र और फ़साना तवील था
आग़ाज़ ही लिखा गया अंजाम रह गया

उठ उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए
दहशत-गरों के हाथ में इस्लाम रह गया

उस का क़ुसूर ये था बहुत सोचता था वो
वो कामयाब हो के भी नाकाम रह गया

अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स
गिनती के चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile