विज्ञापन

मिर्ज़ा ग़ालिब: रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            
रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो

बे-दर-ओ-दीवार सा इक घर बनाया चाहिए
कोई हम-साया न हो और पासबाँ कोई न हो

पड़िए गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाइए तो नौहा-ख़्वाँ कोई न हो
 
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile