विज्ञापन

Urdu Poetry: सादगी पहचान जिस की ख़ामुशी आवाज़ है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            सादगी पहचान जिस की ख़ामुशी आवाज़ है
        
                                                    
                            
सोचिए उस आइने से क्यूँ कोई नाराज़ है

बे-सबब सायों को अपने लम्बे क़द पे नाज़ है
ख़ाक में मिल जाएँगे ये शाम का आग़ाज़ है

यूँ हवा लहरों पे कुछ तहरीर करती है मगर
झूम कर बहता है दरिया का यही अंदाज़ है

देख कर शाहीं को पिंजरे में पतिंगा कुछ कहे
जानता वो भी है किस में क़ुव्वत-ए-पर्वाज़ है

क्यूँ मुग़न्नी के लिए बेचैन है तू इस क़दर
ऐ दिल-ए-नादाँ कि तू तो इक शिकस्ता साज़ है

~ मयंक अवस्थी

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 

2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile