विज्ञापन

माधव कौशिक:  निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है
        
                                                    
                            
हवा का रुख बदलने के लिए चाहत ही काफी है।

ज़रूरत ही नहीं अहसास को अलफाज़ की कोई,
समुदर की तरह अहसास में शिद्दत ही काफी है।

मुबारक हों तुम्हें जीने के अंदाज़ शहरों में,
हमें तो गाँवों में मरने की बस राहत ही काफी है।

बड़े हथियार लिए जंग़ में शामिल हुए लोगों,
बुराई से निपटने के लिए क़ुदरत ही काफी है।

किसी दिलदार की दीवार क़िस्मत में नहीं तो क्या,
ये छप्पर, झोंपड़े, खपरैल की यह छत ही काफी है।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Deepak Sharma

24 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12492 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10362 कविताएं

View Profile