फूल को ख़ार बनाने पे तुली है दुनिया
सबको अंगार बनाने पे तुली है दुनिया
मैं महकती हुई मिट्टी हूं किसी आंगन की
मुझको दीवार बनाने पे तुली है दुनिया
हमने लोहे को गलाकर जो खिलौने ढाले
उनको हथियार बनाने पे तुली है दुनिया
जिनपे लफ़्ज़ों की नुमाइश के सिवा कुछ भी नहीं
उनको फ़नकार बनाने पे तुली है दुनिया
नन्हें बच्चों से 'कुंअर' छीन के भोला बचपन
उनको हुशियार बनाने पे तुली है दुनिया
~ कुंअर 'बेचैन'
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