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कृष्ण कुमार नाज़ की ग़ज़ल: जो ख़ुद उदास हो वो क्या ख़ुशी लुटाएगा

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  जो ख़ुद उदास हो वो क्या ख़ुशी लुटाएगा 
बुझे दिये से दिया किस तरह जलाएगा 

कमान ख़ुश है कि तीर उस का कामयाब रहा 
मलाल भी है कि अब लौट के न आएगा 

वो बंद कमरे के गमले का फूल है यारो 
वो मौसमों का भला हाल क्या बताएगा 
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मैं जानता हूँ तिरे बा'द मेरी आँखों में 
बहुत दिनों तिरा एहसास झिलमिलाएगा 

तुम उस को अपना समझ तो रहे हो 'नाज़' मगर 
भरम भरम है किसी रोज़ टूट जाएगा 

2 वर्ष पहले
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