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World Sleep Day 2024: 'नींद' पर कहे गए चुनिंदा अशआर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  जिन को नींदों की न हो चादर नसीब 
उन से ख़्वाबों का हसीं बिस्तर न माँग 
~ ताहिर फ़राज़

नींद आँख में भरी है कहाँ रात भर रहे 
किस के नसीब तुम ने जगाए किधर रहे 
~ लाला माधव राम जौहर
 
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नींद आती है अगर जलती हुई आँखों में 
कोई दीवाने की ज़ंजीर हिला देता है 
~ शहज़ाद अहमद

टूटती रहती है कच्चे धागे सी नींद 
आँखों को ठंडक ख़्वाबों को गिरानी दे 
~ ज़ेब ग़ौरी

तन्हाई से आती नहीं दिन रात मुझे नींद 
या-रब मिरा हम-ख़्वाब ओ हम-आग़ोश कहाँ है 
~ शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

अब आओ मिल के सो रहें तकरार हो चुकी 
आँखों में नींद भी है बहुत रात कम भी है 
~ निज़ाम रामपुरी

भरी रहे अभी आँखों में उस के नाम की नींद 
वो ख़्वाब है तो यूँही देखने से गुज़रेगा 
~ ज़फ़र इक़बाल

कैसा जादू है समझ आता नहीं 
नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के 
~ इब्न-ए-मुफ़्ती

नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी 
सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में 
~ आदिल मंसूरी

नींद को लोग मौत कहते हैं 
ख़्वाब का नाम ज़िंदगी भी है 
~ अहसन यूसुफ़ ज़ई

2 वर्ष पहले
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