तुम्हारा दिल है जिसे भी चाहो उसे बसाओ, हमारा क्या है
कभी जहाँ हम रहे वहाँ अब तुम्हीं बताओ हमारा क्या है
हमारे पहलू को छोड़कर जब चले गये तो चले गये तुम
जिसे भी चाहो उसे तुम अपने गले लगाओ, हमारा क्या है
जिसे तुम अपनी समझ रहे हो तुम्हारी महफ़िल नहीं है साहब
अगर जलानी है जान अपनी भले जलाओ, हमारा क्या है
कहा था तुमसे कि वो किसी का न हो सका है न हो सकेगा
उसी से फिर भी निभाना है तो निभाए जाओ, हमारा क्या है
अब उसकी बातें सुना के हमको हमारी नज़रों से मत गिरो तुम
तुम उससे तौबा करो कि उसको फिर आज़माओ, हमारा क्या है
अजीब हो तुम कि हर किसी से लगाया दिल औ’र ज़ख़्म खाये
अब इनको साहब हरा रखो या रफ़ू कराओ, हमारा क्या है
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