न कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए
ख़ुदा करे कि नया साल सब को रास आए
~अज्ञात
विज्ञापन
नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें
चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें
~अज्ञात
चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतें
दीवार से पुराना कैलन्डर उतार दे
~ज़फ़र इक़बाल
दुल्हन बनी हुई हैं राहें
जश्न मनाओ साल-ए-नौ के
~साहिर लुधियानवी
अब के बार मिल के यूँ साल-ए-नौ मनाएँगे
रंजिशें भुला कर हम नफ़रतें मिटाएँगे
~ अज्ञात