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जव्वाद शैख़: हम कभी उस के पसंदीदा हुआ करते थे

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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ज़रा सी बात पे नम-दीदा हुआ करते थे
हम भी क्या सादा-ओ-पेचीदा हुआ करते थे

'अक्स-बंदी की हवस इन में कहाँ से आई
मेहरबाँ हाथ तो नादीदा हुआ करते थे

अब हमें देख के लगता तो नहीं है लेकिन
हम कभी उस के पसंदीदा हुआ करते थे

तू ने किस मौज में ये हाल किया है अपना
लोग क्या क्या तिरे गिरवीदा हुआ करते थे

तुझ से पहले भी मिरे राज़ थे इक शख़्स के पास
फ़र्क़ इतना है कि पोशीदा हुआ करते थे

साहिबुर्राए कहाँ इतने बहम थे पहले
ये चुनीदा तो बहुत चीदा हुआ करते थे

उन दिनों इतने वसाइल नहीं होते थे मगर
फिर भी कुछ लोग जहाँ-दीदा हुआ करते थे
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6 महीने पहले
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