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Urdu Poetry: मेहदी हसन की आवाज़ में सुना होगा कि 'दुनिया किसी के प्यार में जन्नत से कम नहीं'

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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बुलबुल ने गुल से, गुल ने बहारों से कह दिया
इक चौदहवी के चांद ने तारों से कह दिया

दुनिया किसी के प्यार में जन्नत से कम नहीं


इक दिलरुबा है दिल में जो हूरों से कम नहीं

भूले से मुस्कराओ तो मोती बरस पड़ें


पलकें उठा के देखो तो कलियां भी हंस पड़ें
ख़ुश्बू तुम्हारी ज़ुल्फ़ की फुलों से कम नहीं
दुनिया किसी के प्यार में जन्नत से कम नहीं

तुम बादशाह-ए-हुस्न हो हुस्न-ए-जहान हो


जान-ए-वफ़ा हो और मुहब्बत की शान हो
जलवे तुम्हारे हुस्न के तारों से कम नहीं 
दुनिया किसी के प्यार में जन्नत से कम नहीं

2 वर्ष पहले
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