विज्ञापन

चरण सिंह बशर की ग़ज़ल: होंठ सूख जाते हैं हाल-ए-दिल सुनाने में

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            सर उठा के मत चलिए आज के ज़माने में
        
                                                    
                            
जान जाती रहती है हौसला दिखाने में

किस से हक़ तलब कीजे बेवफ़ा ज़माने में
होंठ सूख जाते हैं हाल-ए-दिल सुनाने में

हाथ की लकीरों से फ़ैसले नहीं होते
अज़्म का भी हिस्सा है ज़िंदगी बनाने में

खो गए कहाँ मेरे ए'तिबार के रिश्ते
किस ने बो दिए काँटे फूल से घराने में

मंज़िलों की बातें तो ख़्वाब जैसी बातें हैं
उम्र बीत जाती है रास्ता बनाने में

ऐ 'बशर' मिरी आँखें जुगनुओं की आदी थीं
किस ने बिजलियाँ रख दीं मेरे आशियाने में

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।  

2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all