विज्ञापन

बिस्मिल सईदी: सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते
        
                                                    
                            
हर दर पे जो झुक जाए उसे सर नहीं कहते

का'बे में मुसलमान को कह देते हैं काफ़िर
बुत-ख़ाने में काफ़िर को भी काफ़िर नहीं कहते

रिंदों को डरा सकते हैं क्या हज़रत-ए-वाइ'ज़
जो कहते हैं अल्लाह से डर कर नहीं कहते

का'बे ही में हर सज्दे को कहते हैं इबादत
मय-ख़ाने में हर जाम को साग़र नहिं कहते

हर बार नए शौक़ से है अर्ज़-ए-तमन्ना
सौ बार भी हम कह के मुकर्रर नहीं कहते

मय-ख़ाने के अंदर भी वो कहते नहीं मय-ख़्वार
जो बात कि मय-ख़ाने के बाहर नहीं कहते

क्या अहल-ए-जहाँ तुझ को सितमगर नहीं कहते
कहते तो हैं लेकिन तिरे मुँह पर नहीं कहते

कहते हैं मोहब्बत फ़क़त उस हाल को 'बिस्मिल'
जिस हाल को हम उन से भी अक्सर नहीं कहते

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o  


 
9 hours ago
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10736 कविताएं

View Profile