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अख़्तर शीरानी: क्या कह गई किसी की नज़र कुछ न पूछिए

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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क्या कह गई किसी की नज़र कुछ न पूछिए


क्या कुछ हुआ है दिल पे असर कुछ न पूछिए

वो देखना किसी का कनखियों से बार बार
वो बार बार उस का असर कुछ न पूछिए

रो रो के किस तरह से कटी रात क्या कहें
मर मर के कैसे की है सहर कुछ न पूछिए

'अख़्तर' दयार-ए-हुस्न में पहुँचे हैं मर के हम
क्यूँ-कर हुआ है तय ये सफ़र कुछ न पूछिए
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6 महीने पहले
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