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अहमद सलमान: ये हाथ मैं तिरे हाथों में रख के भूल गया

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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ये हाथ मैं तिरे हाथों में रख के भूल गया
कि इक किताब किताबों में रख के भूल गया

नुजूमियों ने बताया कि कातिब-ए-तक़दीर
मिरा नसीब सितारों में रख के भूल गया

हज़ार चेहरे जो बदले तो खो गया चेहरा
मैं अपना जिस्म लिबासों में रख के भूल गया

न जाने कौन से प्याले में आब-ए-कौसर था
यहीं कहीं मैं शराबों में रख के भूल गया

है याद आज भी दफ़्तर का एक इक काग़ज़
पर अपने ख़्वाब दराज़ों में रख के भूल गया
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1 सप्ताह पहले
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