विज्ञापन

अहमद मुश्ताक़: मिल ही आते हैं उसे ऐसा भी क्या हो जाएगा

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


मिल ही आते हैं उसे ऐसा भी क्या हो जाएगा
बस यही ना दर्द कुछ दिल का सिवा हो जाएगा

वो मिरे दिल की परेशानी से अफ़्सुर्दा हो क्यूँ
दिल का क्या है कल को फिर अच्छा भला हो जाएगा

घर से कुछ ख़्वाबों से मिलने के लिए निकले थे हम
क्या ख़बर थी ज़िंदगी से सामना हो जाएगा

रोने लगता हूँ मोहब्बत में तो कहता है कोई
क्या तिरे अश्कों से ये जंगल हरा हो जाएगा

कैसे आ सकती है ऐसी दिल-नशीं दुनिया को मौत
कौन कहता है कि ये सब कुछ फ़ना हो जाएगा 

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nathuram Kaswan

8702 कविताएं

View Profile

Manoj Kumar

428 कविताएं

View Profile