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आज का शब्द: दानी और मैथिलीशरण गुप्त की रचना- जय जय भारत-भूमि-भवानी!

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- दानी, जिसका अर्थ है- बहुत दान करने वाला, उदार, दाता। प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त की रचना-  जय जय भारत-भूमि-भवानी!

जय जय भारत-भूमि-भवानी! 
अमरों ने भी तेरी महिमा 
बारंबार बखानी। 

तेरा चंद्र-वदन वर विकसित 
शांति-सुधा बरसाता है; 
मलयानिल-निश्वास निराला 
नवजीवन सरसाता है। 

हृदय हरा कर देता है यह 
अंचल तेरा धानी; 
जय जय भारत-भूमि-भवानी! 

उच्च-हृदय-हिमगिरि से तेरी 
गौरव-गंगा बहती है; 
और करुण-कालिंदी हमको 
प्लावित करती रहती है। 

मौन मग्न हो रही देखकर 
सरस्वती-विधि वाणी; 
जय जय भारत-भूमि-भवानी! 
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तेरे चित्र विचित्र विभूषण 
हैं फूलों के हारों के; 
उन्नत-अंबर-आतपत्र में 
रत्न जड़े हैं तारों के। 

केशों से मोती झरते हैं 
या मेघों से पानी? 
जय जय भारत-भूमि-भवानी! 

वरद-हस्त हरता है तेरे 
शक्ति-शूल की सब शंका; 
रत्नाकर-रसने, चरणों में 
अब भी पड़ी कनक लंका। 

सत्य-सिंह-वाहिनी बनी तू 
विश्व-पालिनी रानी; 
जय जय भारत-भूमि-भवानी! 

करके माँ, दिग्विजय जिन्होंने 
विदित विश्वजित याग किया, 
फिर तेरा मृत्पात्र मात्र रख 
सारे घन का त्याग किया। 

तेरे तनय हुए हैं ऐसे 
मानी, दानी, ज्ञानी— 
जय जय भारत-भूमि-भवानी! 

तेरा अतुल अतीत काल है 
आराधन के योग्य समर्थ; 
वर्तमान साधन के हित हैं 
और भविष्य सिद्धि के अर्थ। 

भुक्ति मुक्ति की युक्ति, हमें तू 
रख अपना अभिमानी; 
जय जय भारत-भूमि-भवानी! 

2 वर्ष पहले
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