'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- वारि, जिसका अर्थ है- पानी, जल। प्रस्तुत है सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की कविता- पतित पावनी, गंगे!
पतित पावनी, गंगे!
निर्मल-जल-कल-रंगे!
कनकाचल-विमल-धुली,
शत-जनपद-प्रगद-खुली,
मदन-मद न कभी तुली
लता-वारि-भ्रू-भंगे!
सुर-नर-मुनि-असुर-प्रसर
स्तव रव-बहु गीत-विहर
जल धारा धाराधर—
मुखर, सुकर-कर-अंगे!
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