विज्ञापन

आज का शब्द: शोभन और ओम निश्चल की कविता- भीतर एक नदी बहती है

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- शोभन, जिसका अर्थ है- सुंदर, सुहावना, उत्तम। प्रस्तुत है ओम निश्चल की कविता- भीतर एक नदी बहती है
        
                                                    
                            

चंचल हिरनी बनी डोलती
मन के वन में बाट जोहती,
वैसे तो वह चुप रहती है
भीतर एक नदी बहती है।

सन्नाटे का मौन समझती
इच्छाओं का मौन परखती
सॉंसों के सरगम से निकले
प्राणों का संगीत समझती
तन्वंगी, कोकिलकंठी है
पीड़ाओं की चिरसंगी है
अपने निपट अकेलेपन के
वैभव में वह खुश रहती है
भीतर एक नदी बहती है।

अभी कहॉं उसने जग देखा
किया पुण्य का लेखा-जोखा
अभी सामने सारा जीवन
उम्मीदों का खुला झरोखा
कुछ सपने उसके अपने हैं
महाकाव्य उसको रचने हैं
मन ही मन गुनती बुनती है
पर अपने धुन में रहती है
भीतर एक नदी बहती है।

शब्द शब्द हैं उसकी थाती
जिनसे लिखती है वह पाती
वह कविता के अतल हृदय में
बाल रही है स्नेहिल बाती
लता-वल्लरी-सी शोभन वह
इक रहस्य-सी है गोपन वह
किन्तु हुलस कर बतियाती वह
कभी-कभी सुख-दुख कहती है
भीतर एक नदी बहती है।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

4 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

SATYENDRA KUMAR

133 कविताएं

View Profile

Pankaj Sharma

1246 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12655 कविताएं

View Profile

Prasoon Saxena

966 कविताएं

View Profile