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आज का शब्द: शैलपुत्री और सरिता महाबलेश्वर सैल की कविता- निर्झर बहती रहती हूँ

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है शैलपुत्री, जिसका अर्थ है- देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक, पार्वती, गौरी। प्रस्तुत है सरिता महाबलेश्वर सैल की कविता- निर्झर बहती रहती हूँ

जहाँ जहाँ से गुजरी मैं
वहाँ-वहाँ जन्मी सभ्यता
जहाँ जहाँ ठहरी मैं
वहाँ-वहाँ बसी मानवता

नदी हूँ चलते रहना मुझे
रूके कभी ना मेरे पांव
ढूँढ रही मैं एक किनारा
बने जो एक मेरा ठांव

यात्रा मेरी जीवन सी, मिली
अवेहलना हर्ष-दुत्कार सभी
स्त्री जीवन है ही ऐसी
हर भाव मुझे स्विकार अभी
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जब जब समाज ने चाहा
धो दूँ उनके पापों का अंकुर
समझा उनको मैने,
जीवन यह नश्वर क्षणभंगुर

शैल पुत्री सरिता मैं
निर्झर बहती रहती हूँ
4 वर्ष पहले
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