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आज का शब्द: प्रपंच और प्रेमशंकर शुक्ल की कविता- आकाश और आँख

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- प्रपंच, जिसका अर्थ है- संसार और उसका जंजाल, झमेला, आडम्बर। प्रस्तुत है प्रेमशंकर शुक्ल की कविता- आकाश और आँख
        
                                                    
                            

आकाश और आँख जुड़वा हैं
दोनों को धरती का जीवन निहारने में सुख मिलता है
आकाश उदास होता है तो आँख का
किसी काम में जी नहीं लगता
दुनियादारी के प्रपंच निहार
आँख डबडबा आती है तो भीतर तक
भीग जाता है आकाश
निगाह संधि है
निगाह के सहारे ही आकाश
आँख में उतरता है
और अपने अथाह विस्तार में आकाश
आँख के लिए खोलता रहता है दिशाएँ
आँख अपनी नींद और स्वप्न
आकाश में रखती है
और आकाश अपना सारा फैलाव
आँख के भरोसे ही छोड़े रखता है
आँख और आकाश एकात्म हैं
दुनियादारी देख-देख
आँख जब शब्द रच रही होती है
आकाश उनके उड़ने के लिए
पंख लगा रहा होता है
पुरानी से पुरानी पोथी खोलिए आप
शब्दाकाश में आँख और आकाश की
धड़कने सुनाई देती रहती हैं

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2 महीने पहले
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