विज्ञापन

आज का शब्द: नियंता और अज्ञेय की कविता- शत्रु मेरी शान्ति के-ओ बन्धु

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- नियंता, जिसका अर्थ है- नियम बनानेवाला, नियंत्रण व्यवस्था करनेवाला। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- शत्रु मेरी शान्ति के-ओ बन्धु
        
                                                    
                            

शत्रु मेरी शान्ति के-ओ बन्धु इस अस्तित्व के उल्लास के;
ऐन्द्रजालिक चेतना के-स्तम्भ डावाँडोल दुनिया में अडिग विश्वास के;
लालसा की तप्त लालिम शिखे-
स्थिर विस्तार संयम-धवल धृति के;

द्वैत के ओ दाह-
जड़ता के जगत् में अलौकिक सन्तोष सुकृति के;
अनाचारी, सर्वद्रावी, सर्वग्रासी-
ओ नियन्ता एक अभिनव शील के, व्रती मेरे यती संगी

हृदय के जगते उजाले, निवेदित इह के निवासी!
प्रणति ले ओ नियति के प्रतिरूप-जलते तेज जीवन के;
प्रखर स्वर विद्रोह के प्रतिपुरुष सात्त्विक मुक्ति के;
मेरी प्रणति ले, स्वयम्भू आलोक मन के!
प्रणति ले!
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12614 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile

User

29 कविताएं

View Profile