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आज का शब्द: मसृण और मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'कुशलगीत'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - मसृण जिसका अर्थ है 1. कोमल 2. सुंदर 3. चिकना। कवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 



हाँ, निशान्त आया,
तूने जब टेर प्रिये, कान्त, कान्त, उठो, गाया - 
चौँक शकुन-कुम्भ लिये हाँ, निशान्त गाया।
आहा! यह अभिव्यक्ति,
द्रवित सार-धार-शक्ति।
तृण-तृण की मसृण भक्ति
भाव खींच लाया।
तूने जब टेर प्रिये, "कान्त, उठो" गाया!

मगध वा सूत गये,
किन्तु स्वर्ग-दूत नये,
तेरे स्वर पूत अये,
मैंने भर पाया।
तूने जब टेर प्रिये, "कान्त, उठो" गाया। 
 
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