'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- दनुज, जिसका अर्थ है- असुर, राक्षस। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- सचमुच तेरी बड़ी निराशा
सचमुच तेरी बड़ी निराशा!
जल की धार पड़ी दिखलाई,
जिसने तेरी प्यास बढाई,
मरुथल के मृगजल के पीछे दौड़ मिटी सब तेरी आशा!
सचमुच तेरी बड़ी निराशा!
तूने समझा देव मनुज है,
पाया तूने मनुज दनुज है,
बाध्य घृणा करने को यों है पूजा करने की अभिलाषा!
सचमुच तेरी बड़ी निराशा!
समझा तूने प्यार अमर है,
तूने पाया वह नश्वर है,
छोटे से जीवन से की है तूने बड़ी-बड़ी प्रत्याशा!
सचमुच तेरी बड़ी निराशा!
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