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आज का शब्द: चाह और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता- जाग उठेगा वह अनुराग

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- चाह, जिसका अर्थ है- इच्छा, अभिलाषा, प्रेम, प्रीति। प्रस्तुत है सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता- जाग उठेगा वह अनुराग

सोया था संयोग उसे
किस लिए जगाने आए हो?
क्या मेरे अधीर यौवन की
प्यास बुझाने आए हो??

रहने दो, रहने दो, फिर से
जाग उठेगा वह अनुराग।
बूँद-बूँद से बुझ न सकेगी,
जगी हुई जीवन की आग॥
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झपकी-सी ले रही
निराशा के पलनों में व्याकुल चाह।
पल-पल विजन डुलाती उस पर
अकुलाए प्राणों की आह॥

रहने दो अब उसे न छेड़ो,
दया करो मेरे बेपीर!
उसे जगाकर क्यों करते हो?
नाहक मेरे प्राण अधीर॥
4 वर्ष पहले
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