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आज का शब्द: अनिल और हरिवंशराय बच्चन की कविता- लहर सागर का नहीं शृंगार

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अनिल, जिसका अर्थ है- वायु, पवन, हवा, समीर। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- लहर सागर का नहीं शृंगार 
        
                                                    
                            

लहर सागर का नहीं शृंगार,
उसकी विकलता है;
अनिल अंबर का नहीं खिलवार,
उसकी विकलता है;
विविध रूपों में हुआ साकार,
रंगों में सुरंजित,
मृत्तिका का यह नहीं संसार,
उसकी विकलता है।

गंध कलिका का नहीं उद्गार,
उसकी विकलता है;
फूल मधुवन का नहीं गलहार,
उसकी विकलता है;
कोकिला का कौन-सा व्यवहार,
ऋतुपति को न भाया?
कूक कोयल की नहीं मनुहार,
उसकी विकलता है।

गान गायक का नहीं व्यापार,
उसकी विकलता है;
राग वीणा की नहीं झंकार,
उसकी विकलता है;
भावनाओं का मधुर आधार
साँसों से विनिर्मित,
गीत कवि-उर का नहीं उपहार,
उसकी विकलता है।

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9 महीने पहले
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