विज्ञापन

आज का शब्द: अनिर्वाप्य और सुमित्रानंदन पंत की कविता 'नव इंद्रिय'

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - अनिर्वाप्य जिसका अर्थ है जिसका शमन न किया जा सके। कवि सुमित्रानंदन पंत ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 



नव जीवन को इंद्रिय दो हे, मानव को,
नव जीवन की नव इंद्रिय,
नव मानवता का अनुभव कर सके मनुज
नव चेतनता से सक्रिय!

स्वर्ग खंड इस पुण्य भूमि पर
प्रेत युगों से करते तांडव,
भव मानव का मिलन तीर्थ
बन रहा रक्त चंडी का रौरव!
अनिर्वाप्य साम्राज्य लालसा
अगणित नर आहुति देती नव,
जाति वर्ग औ’ देश राष्ट्र में
आज छिड़ा प्रलयंकर विप्लव!

नव युग की नव आत्मा दो पशु मानव को,
नव जीवन की नव इंद्रिय,
भव मानवता का साम्राज्य बने भू पर
दश दिशि के जनगण को प्रिय। 
 
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all