मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूं
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी
दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
- इफ़्तिख़ार राग़िब
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फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
- साजिद प्रेमी
इतना नाराज़ हो क्यूँ उस ने जो पत्थर फेंका
उस के हाथों से कभी फूल भी आया होगा
- साग़र आज़मी
लोग काँटों से बच के चलते हैं
मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं
- अज्ञात
हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है अक्सर
लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं
- बिस्मिल सईदी
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
- परवीन शाकिर
फूल तो फूल हैं आँखों से घिरे रहते हैं
काँटे बे-कार हिफ़ाज़त में लगे रहते हैं
- वसीम बरेलवी
काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ
- शकील बदायुनी
फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
- मीर तक़ी मीर