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Rose Day: रोज डे- फूलों पर कहे गए 10 शेर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूं
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी

दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
- इफ़्तिख़ार राग़िब 
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फूल ही फूल याद आते हैं 
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं 
- साजिद प्रेमी

इतना नाराज़ हो क्यूँ उस ने जो पत्थर फेंका 
उस के हाथों से कभी फूल भी आया होगा 
- साग़र आज़मी 

लोग काँटों से बच के चलते हैं 
मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं 
- अज्ञात

हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है अक्सर 
लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं 
- बिस्मिल सईदी

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा 
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा 
- परवीन शाकिर

फूल तो फूल हैं आँखों से घिरे रहते हैं 
काँटे बे-कार हिफ़ाज़त में लगे रहते हैं 
- वसीम बरेलवी 

काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर 
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ 
- शकील बदायुनी

फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे 
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत 
- मीर तक़ी मीर
3 वर्ष पहले
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