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बद्रीनारायण उपाध्याय 'प्रेमघन' : तेरे इश्क़ में हमने दिल को जलाया

काव्य डेस्क

Irshaad
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                            तेरे इश्क़ में हमने दिल को जलाया 
        
                                                    
                            

तेरे इश्क़ में हमने दिल को जलाया 
क़सम सर की तेरे, मज़ा कुछ न आया 

नज़र ख़ार की शक़्ल आते हैं सब गुल 
इन आँखों में जब से तू आकर समाया 

असर हो न क्यों दिल में दिल से जो चाहे 
मसल सच है, जो उसको ढूँढ़ा वो पाया 

चमन में है बरसात की आमद-आमद 
अहा आसमाँ पर सियह अब्र छाया 

मचाया है मोरों ने क्या शोरे-मैहशर 
पपीहों ने क्या पुर-गजब रट लगाया 

तुझे शैख़ जिसने बनाया है मोमिन 
हमें भी है हिन्दू उसी ने बनाया 

परीशाँ हो क्यों अब्रे-बेख़ुद भला तुम 
कहो किस सितमगर से है दिल लगाया 

- बद्रीनारायण उपाध्याय 'प्रेमघन' 

साभार - हिन्दी की बेहतरीन ग़ज़लें, भारतीय ज्ञानपीठ 
8 वर्ष पहले
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