‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ ब्रह्माण्डिकी के विकास का एक संक्षिप्त दस्तावेज है। ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति किस प्रकार हुई, यह कहां से आया और क्या यह शाश्वत है या किसी ने बाकायदा इसकी रचना की है ? ऐसे अनगिनत सवालों का जवाब देती है यह किताब।
महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की बहुचर्चित पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ ने बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस पुस्तक के कारण स्टीफन की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि रास्ते में उन्हें देखते ही लोग उनसे बात करने के लिए उतावले हो जाते। अमेरिका में ही उनकी पुस्तक की छह लाख प्रतियां बिकीं। उनकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार विज्ञान के एक प्रोफेसर अपनी कार धुलवाने के लिए गैराज में रुके। वहां पर कार की धुलाई करने वाले एक कर्मचारी ने उनसे पूछा, ''आप
प्रोफेसर हैं? क्या आप प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग को जानते हैं? वे मेरे हीरो हैं।''
अपनी इस पुस्तक के बारे में हॉकिंग ने लिखा था-“इस पुस्तक का लगभग 40 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है तथा विश्व के हर 750 स्त्री-पुरुषों तथा बच्चों के लिए लगभग एक प्रति के हिसाब से यह बिक चुकी है। मैडोना पर लिखी गई, जितनी पुस्तकों की बिक्री हुई हैै, उसकी अपेक्षा भौतिकी पर लिखी गई किताब की अधिक बिक्री हुई।
‘ए ब्रीफ हिस्ट्री.....’ की सफलता यह सकारात्मक संकेत देती है कि इन महत्वपूर्ण प्रश्नों में लोगों को व्यापक अभिरुचि है कि हम कहां से आए? और ब्रह्मांड का स्वरूप ऐसा ही क्यों है? 14.99 डॉलर मूल्य की पुस्तक, जिसकी कई लाख प्रतियां इंग्लैंड में भी बिक जाएं। लगातार तीन वर्ष तक सबसे अधिक बिक्री वाली पुस्तक के रूप में जिसका नाम दर्ज हो जाए, उस पुस्तक की अपार लोकप्रियता का राज क्या है? एक बार बनॉर्ड लावटर्न ने टाइम पत्रिका में छपे अपने लेख में लिखा था कि जिस प्रकार विधाता का रहस्य चमत्कारिक है, उसी प्रकार इस पुस्तक की लोकप्रियता रहस्यमय है। जो व्यक्ति इस रहस्य को खोलेगा, उसे मेरी ओर से पुरस्कार दिया जाएगा।
लावटर्न की इस घोषणा के प्रति उत्तर में कई लेख आए, लेकिन सबसे सुंदर उत्तर स्टीफन हॉकिंग की मां इसाबेल का माना गया। इसाबेल ने लिखा था कि इस पुस्तक को पढ़ते समय
आनंद मिलता है। इस पुस्तक की संकल्पना तो कठिन है, लेकिन भाषा और लेखन शैली सहज है। पुस्तक में कोई दिखावा नहीं है और न ही पाठक की अवहेलना की गई है। स्टीफन की एक मात्र इच्छा है कि उसकी संकल्पनाएं जिज्ञासु पाठकों की समझ में आ जाए।
उसने विकलांगता को चैलेंज किया है। विकलांगता को मात दी है। डॉक्टरों की भविष्यवाणी को फेल किया है। चिकित्सा जगत को भी चुनौती दी है। उसकी पुस्तक की लोकप्रियता का यही राज है। इसाबेल ने यह भी स्वीकार किया है कि यद्यपि पुस्तक उनकी भी समझ में नहीं आई है, लेकिन उन्होंने पुस्तक को अंतिम वाक्य तक पढ़ा है।
पुस्तक की लोकप्रियता के संबंध में रूस के विख्यात वैज्ञानिक आन्द्रेई लेवचेनको ने भी अपना एक अनुभव मीडिया को बताया था। एक बार वे हवाई जहाज से यात्रा कर रहे थे। उनकी बगल में बैठा व्यक्ति 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' नामक पुस्तक पढ़ रहा था। आन्द्रेई ने सहयात्री से पूछा, ''यह पुस्तक आपको कैसे लगी?'' सहयात्री का जवाब था, ''आकर्षक, एकदम दिल को छू लेने वाली।'' आन्द्रेई ने चकित होकर कहा, ''मैंने भी यह पुस्तक पढ़ी है, लेकिन मेरे पल्ले, तो कुछ नहीं पड़ा।''
थोड़ी देर तक दोनों चुप रहे। आन्द्रेई ने सहयात्री से फिर पूछा, ''क्या आप वैज्ञानिक हैं?'' ''नहीं, मैं एक व्यापारी हूं।'' सहयात्री ने जवाब दिया। आन्द्रेई बोल, ''अच्छा!'' सहयात्री ने पुस्तक बंद की। उसे अपनी गोद में रखा और आन्द्रेई की ओर मुखातिब होकर बोला, ''अब मैं इस पुस्तक को आपको समझा देता हूं'' और आन्द्रेई जैसे विख्यात भौतिक वैज्ञानिक को वह व्यापारी अंतरिक्ष, ब्लैक होल आदि की जानकारी देने लगा।
स्टीफन हॉकिंग (1942-2018)
अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम, प्रथम संस्करण-1988
लेखक - स्टीफन हॉकिंग
प्रकाशक - बैंटम डेल पब्लिशिंग ग्रुप
8 वर्ष पहले