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'आपकी आंखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं' सुकून के साहिल पर ले जाता यह गीत

काव्य डेस्क

Mere Azeez Filmi Nagme
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                            आप की आंखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं, आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं... 'घर' फ़िल्म का यह नग़्मा वक़्त-बेवक़्त मैं जब भी सुनता हूं तो माज़ी (अतीत) की उन हसीन यादों की दुनिया में खो जाता हूं, जब मैं उसे पहली नज़र देखकर दिल हार बैठा।
        
                                                    
                            

उस वक़्त ऐसा महसूस हुआ कि वो मेरे दिल की दुनिया में इश्क़ के राज़ छुपाई आखों के रास्ते दाख़िला हो रहा है। दुनिया में मोहब्बत का कोई भी क़द्रदान यह ज़रूर मानेगा कि मोहब्बत में एक वक़्त पर आकर ख़ामोशियां अपने अल्फ़ाज़ गढ़ लेती हैं। मोहब्बत करने वाले को पता ही नहीं चलता कि महबूब की कौनसी अदा ने उसे गिरफ़्त में लिया है....

लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं  
आप की आंखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कहीं
आप की खामोशियां भी आप की आवाज़ हैं

किशोर की दिलकश आवाज़ में जब गाने की ये लाइनें सुनता हूं तो लगता है  मुझे शायद उसकी आंखों और उसकी ख़ामोशियों ने मोहब्बत की गिरफ़्त में लिया। दरअस्ल, हमारी नज़रें मिलती तो बहुतों से हैं, लेकिन महबूब वही है जिस पर निगाहें ठहर जाए, जिसे देखकर दिल बेहोश, आंखें मदहोश और लब रेगिस्तान में भटके किसी मुसाफ़िर की मानिंद हो जाएं। 

इस कैफ़ियत में जब कोई मुब्तला होता है तो दुनिया बेगानी और चांद बे-नूर लगता है। बस दिल में तड़प होती है कि आंखों से क़त्ल करने वाला वो महबूब ख़ुद को मेरा क़ात़िल तस्लीम कर ले। ताकि दिल को ये यक़ीन आ जाए....

आप की बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं    
बेवजह तारीफ़ करना आप की आदत तो नहीं
आप की बदमाशियों के ये नये अंदाज़ हैं
आप की आंखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं

दुनिया की उलझनों और दौड़ती भागती ज़िंदगी से फुर्स़त मिलती है तो यह नग़्मा ज़रूर सुनता हूं। यक़ीन जानिए यह नग़्मा सुनकर महबूब से लड़ी उस पहली नज़र के महके हुए से राज़ की यादों में खो जाता हूं। उसके बाद इश्क़ का ऐसा ख़ुमार तारी होता है कि खुद को दुनिया के भंवर से दूर सुकून के साहिल पर पाता हूं।

आप भी महसूस करें इस गीत के मर्म को ..

 
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