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फूलों के बदले , तूने खार बख्शे हैं।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फूलों के बदले , तूने खार बख्शे हैं।
        
                                                    
                            
वक्त ने हमें वीराने दयार बख्शे हैं।।

आस्तीन के सांप तो, सुने थे हमने।
हमें आस्तीनों ने ऐसे यार बख्शे हैं।।

अगरचे साहिल का वादा था यूं तो।
नाखुदा ने हमे ये मंझधार बख्शे हैं।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
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