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ये जुगनुओं के झुरमुट, ये रात के मंज़र।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये जुगनुओं के झुरमुट, ये रात के मंज़र।
        
                                                    
                            
मेरी प्यास बढ़ा रहे हैं बरसात के मंज़र।।

रस्म-ओ-रिवाज को चुभने लगे हैं बहुत।
ज़ाहिर न हो अपनी मुलाकात के मंज़र।।
-यूनुस खान
1 hour ago
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