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आ गयी

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उदासियों से फुर्सत क्या मिली , तन्हाई आ गयी।
        
                                                    
                            
अहल-ए-कफस थे,कैसे मिलने पुरवाई आ गयी।।

कदमों की आहट से,ये जख़्म अब चौंक जाते हैं।
इन्हें महसूस होता है, कि दर्द की दवाई आ गयी।।

-यूनुस खान
2 वर्ष पहले
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