उदासियों से फुर्सत क्या मिली , तन्हाई आ गयी।
अहल-ए-कफस थे,कैसे मिलने पुरवाई आ गयी।।
कदमों की आहट से,ये जख़्म अब चौंक जाते हैं।
इन्हें महसूस होता है, कि दर्द की दवाई आ गयी।।
-यूनुस खान