कामधेनु गौ मात है , वैभव की है खान ।
पंच गव्य सब रोग हर , माता के समजान ॥ 1 ॥
सुरसरि निर्मल धार है , भारत के दरम्यान ।
रोग मिटे पातक टरे, डुबकी से कल्याण ॥2॥
कर्म , भक्ति , और ज्ञान का एक अनूठा सार ।
गीता अमृत जो पिये, मिले मुक्ति का द्वार ॥3॥