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गौ, गंगा , गीता

Vinay Pratap Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कामधेनु गौ मात है , वैभव की है खान ।
        
                                                    
                            
पंच गव्य सब रोग हर , माता के समजान ॥ 1 ॥

सुरसरि निर्मल धार है , भारत के दरम्यान ।
रोग मिटे पातक टरे, डुबकी से कल्याण ॥2॥

कर्म , भक्ति , और ज्ञान का एक अनूठा सार ।
गीता अमृत जो पिये, मिले मुक्ति का द्वार ॥3॥
एक महीने पहले
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