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हो पुनः निर्मल सुजल

Vikas Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सरल बन जाता
        
                                                    
                            
जल की तरह मैं
तरल बन जाता

और प्रिया संग भींग
आलिंगन करूं
कण कण धरा पर
स्नेह जल सिंचन करूं
जो विकल हो ताप से
शीतल मै बरसाता

सरल बन जाता
जल की तरह
मैं तरल बन जाता

गुण दोष ,मल और गरल
सब ओढ कर
उस प्रखर के ताप
संग छोड़ सब
हो पुनः निर्मल सुजल
अमृत मै बरसाता

सरल बन जाता
जल की तरह
मैं तरल बन जाता
-विकास मोहन गुप्ता
2 घंटे पहले
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