प्रेम का कितना खूबसूरत चक्र है न
अनुराग त्याग और वही विरह का राग।
श्यामल शाम का चिर अनंत बसंत
बिखरे अश्रु कण के पीर पुलक संत।
विकल वेदना की अमोल धरोहर
हृदय पर चित्रित इंद्रधनुषी छवि मोहक।
बंधन अक्षय पुनीत नीरव रसाल
अद्भुत अनुभूति का सुखद ताल।
सौंदर्य है श्वास में कंठगत नाम
चरण नूपुर भी अब गाते श्याम।
स्वर्णिम शतरंगी किरणों का क्षार
स्निग्ध नयन से होता पार।
स्वप्न जगत का नायक कौन
धीर धरे मंद मुस्काए जो रौद्र।
प्रेम परिधि की सुंदरता की व्याख्या
मूक मृदुल मौन करता जाता ।
-वंदना अग्रवाल 'निराली'