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मातृभूमि के चरणों में

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नवां शीश नमन करूं मैं हे भारत मां तेरे चरणों मैं,
        
                                                    
                            
लेकर दीप आरती उतारूं करूं तेरा फिर वंदन मैं।
तुझे सजाने हित कितने वीरों ने खून की अपनी रोली बनाई,
तेरी आजादी की खातिर कैसी कैसी सही उन्होंने कठिनाई।।

भूल चुकी है यह पीढ़ी कैसे उन वीरों की त्याग तपस्या,
बढ़ने लगी है आज के जमाने में कैसी-कैसी भोग लिप्सा।
आजादी के उन परवानों ने तोड़ दीं थीं तेरी हर बेड़ी,
दिख रही है क़दम क़दम पर आज उल्टी खेड़ी।।

त्याग तपस्या धैर्य साहस उन वीरों का इतिहास सुनाती हैं,
उनके लहु की हर बूंद कठिन संघर्षों की गाथा सुनाती है।
बेहद कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी जिन्होंने,
सुख भोग रहे हैं हम जो है उन वीरों की दुःख भरी कहानी।।

हंसते हंसते फांसी का फंदा चूमा और खुशियां देकर चले गए,
स्वतंत्रता की इस गाथा में एक संदेश छोड़कर चले गए।
आगे बढ़ाना है इसको अपना कौशल तुमको दिखलाना है,
स्वदेशी हो हर आवरण तुम्हारा विदेशी का नाम मिटाना है।।

हर दिल में राष्ट्र प्रेम का दीप जले और हर ओर उजाला हो,
तीन रंगों से सजा तिरंगा हर घर आंगन में फहराता हो।
हरे भरे खेतों से होकर राष्ट्रीय विकास की लहर चले,
एक जुट होकर हर युवा राष्ट्र धर्म का एक गहरा सार बनें।।
 
14 घंटे पहले
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