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खबर बेखबर की

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक ही साया मेरा और एक ही मैं हमसफर
        
                                                    
                            
मैं जना फिर फ़ना इस जहां को क्या ख़बर

मैं नहीं आया यहां मुझको है लाया गया
क्या हकीकत मेरी मुझको इसकी क्या खबर

एक ही सहरा मिला जैसे खाली दिल मेरा
इसमें कोई और भी ये नहीं मुझको खबर

क्या जुबां बोलूँ के मैं बेजुबान न रहूं
क्या जुबा मुझमें भी है इस की मुझको क्या खबर
एक दिन पहले
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